प्यार की एक सोचा
प्यार की एक सोचा
तुमसे मेरा जितना प्यार
उतना ही शक है,
असमझ हूं असमर्थ
आपकी चर्चा,
भले ही कोशिश करके भी
आप ये नहीं कह पाए की
दो चीजों के बीच क्या रहा,
अपने लाल होठों पर कस कर भी
अटक गया बाहर नहीं आया
चतुर दोगलेपन को किसने छुपाया
तुम्हारी आँखें पलकें घुमाती हैं,
चल से मेरे दिल चुराती है,
इसे मेरे दिल पर मिला
मैं उतना गंबार भी काहाँ,
मैंने इसे समझ लिया है
आप भी शामिल हो गए हैं
दीधीरे धीरे आखों में बस गए हैं
मेरे सीने में होने के नाते।
मैं आपके संपर्क में रहता हूं
खयालों में डूबा रहता हूं
इन दिनों, मेरे सॉनेट्स में
तुम ही तुम नजर आते हो
शब्दों की पंक्ति में शब्द होते हो
दुख की हर बून्द घुटन पीते हो
किसी की उपस्थिति में आपके लिए
सराय कष्टदायी जरूर होता था
कहीं एक छोटी सी अनकही बात,
अब एक जंजीर में बदल गया है
प्रेम का जल धारा बह रहा है
जो कभी भी खत्म होने वाला नहीं है।
मेरे दिल का आसमान
जो हे अमाबास कि अंधकार में
आज प्रकाश की हे तलाश में
अभी बहुत दूर की हे तलाश में
बिल्ड-अप के साथ भी बनाता है
विभिन्न प्रकार के अस्पस्ट चित्र
और बाद में फट जाता है
जो कुछ भी व्यर्थ हो जाता है
वे सारे चमक पर काफी हद तक
मुस्कुराते हुए सपने, कभी कभी
मेरे आँखों से बरसता है,लहू बन के
खून बनकर निकलता है, दिल से
यदि आप किसी भी समय यहां आएं
अपनी को एक नाव के रूप में देखना
कितिना सच और झूठ जरा परख लेना।
धारा जो तुम्हे सूखी दिखाई देती है
किनारे पर वास्तव में पूर्ण नहीं है,
याद में यह जरूर होता होगा की
आपने एक बार अपना नाम लिखा था,
प्रेम संदेश मैंने सहेजा जिस में आपकी
स्वयं का शरीर और संकेत
अपनी उँगलियों से,महसूस करता हूं
मैं तुम्हारे हाथ पर जान पाता हूँ
अपने पैरों के नीचे जब कुचल के
आप इसे महक रखने के लिए आते हैं।
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